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यमन में युद्ध का समर्थन नहीं करेगा अमेरिका, बाइडन ने बदली विदेश नीति

विदेश नीति पर पहले बड़े भाषण में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "यमन में युद्ध ख़त्म होना चाहिए."

लाइव कवरेज

  1. यमन में युद्ध का समर्थन नहीं करेगा अमेरिका, बाइडन का विदेश नीति में बदलाव

    अमेरिका यमन में अपने सहयोगियों की आक्रामक कार्रवाइयों का समर्थन अब नहीं करेगा. यमन बीते छह साल से युद्ध की तबाही झेल रहा है, जिसमें 110,000 लोगों के मारे जाने की बात कही जाती है.

    विदेश नीति पर अपने पहले बड़े भाषण में राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा, “यमन में युद्ध ख़त्म होना चाहिए.”

    बाइडन से पहले के दो राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में अमेरिका ने यमन में विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन किया था.

    इस संघर्ष ने यमन के लाखों लोगों को भुखमरी की कगार पर ला दिया.

    ये लड़ाई 2014 में एक कमज़ोर यमनी सरकार और हूती विद्रोही आंदोलन के बीच शुरू हुई थी. एक साल बाद ये लड़ाई तब और तेज़ हो गई जब सऊदी अरब और अन्य आठ अरब देशों ने हूती विद्रोहियों पर हवाई हमले करने शुरू किए, जिन्हें अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस का समर्थन हासिल था.

    राष्ट्रपति बाइडन ने अमेरीकी विदेशी नीति में और कई बदलावों की भी घोषणा की, जिनमें उन शरणार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि जिन्हें अमेरिकी में आने की अनुमति दी जाएगी, और जर्मनी से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने के फ़ैसले को वापस लेना शामिल है, जहां वो द्वितीय विश्व युद्ध के अंत से तैनात हैं.

    यमन के लिए की गई घोषणा का मतलब क्या है?

    अमेरिका हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ युद्ध में यमन सरकार और उसके सहयोगी सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन का समर्थन करता रहा है. गुरुवार को की गई घोषणा का नतीजा ये होगा कि अमेरिका अब आक्रामक अभियानों का समर्थन करना बंद कर देगा, जिसमें सउदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को युद्ध सामग्री बेचना शामिल था.

    ये बदलाव अरब प्रायद्वीप में अल-कायदा के ख़िलाफ़ ऑपरेशन के लिए नहीं है.

    बाइडन प्रशासन ने पहले ही सऊदी अरब और यूएई को हथियारों बेचने पर अस्थायी रोक लगा दी थी.

    माना जा रहा है कि राष्ट्रपति बाइडन टिम लेंडरकिंग को यमन के राजदूत के तौर पर नियुक्त कर सकते हैं, जो एक अनुभवी राजनयिक और मध्य पूर्व के जानकार हैं.

    नई नीति ट्रंप प्रशासन की नीति से एकदम उलट है, जिन्होंने सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के लिए समर्थन बढ़ा दिया था. पिछले महीने ट्रंप प्रशासन के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने घोषणा की थी कि हूतियों को "आतंकवादी संगठन" नामित किया जा रहा है.

  2. वीगर कैंप: अमेरिका, ब्रिटेन सरकार ने रेप की रिपोर्टों की आलोचना की

    अमेरिकी सरकार ने कहा है कि वो बीबीसी की उस रिपोर्ट से “बहुत परेशान” है जिसमें चीनी कैंपों में वीगर मुस्लिम महिलाओं के साथ पूरी योजना के साथ रेप किए जाने का विवरण है.

    एक प्रवक्ता ने कहा, “इन अत्याचारों से मन को झटका लगता है और ऐसा करने वालों को गंभीर परिणाम भुगतने चाहिए.”

    ब्रिटेन सरकार के एक मंत्री, निगेल एडम्स ने गुरुवार को संसद में कहा कि रिपोर्ट के ज़रिए "स्पष्ट रूप से ग़लत कामों" को सामने लाया गया हैं.

    अनुमान के मुताबिक़, चीन के शिविरों में 10 लाख से अधिक वीगर मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों को हिरासत में रखा गया है.

    बीबीसी ने बुधवार को एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें हिरासत में रहीं उन महिलाओं की आपबीती थी जिनका पुलिस और गार्ड ने पूरी योजना के साथ रेप किया, यौन शोषण किया और यातनाएं दी.

    चीन के विदेश मंत्रालय ने सभी आरोपों से इनकार किया है और बीबीसी पर “झूठी रिपोर्ट” लिखने का आरोप लगाया है.

    प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा, "महिलाओं पर योजना बनाकर कोई यौन हमला और दुर्व्यवहार नहीं हुआ" और चीन मानवाधिकारों के दायरे में रहकर अपने सभी कैंपों का संचालन करता है.

    उन्होंने कहा, “चीन एक कानून द्वारा [शासित]देश है, हमारा संविधान मानवाधिकारों की गारंटी देता है और उनकी रक्षा करता है, और ये हमारी क़ानूनी प्रणाली में समाविष्ट है, जिसके तहत सरकारें काम करती हैं.”

  3. उत्तराखंड: 8 फरवरी से खुलेंगे छठी से 11वीं तक के छात्रों के लिए स्कूल

    उत्तराखंड सरकार ने 8 फरवरी से राज्य में कक्षा 6 से कक्षा 11 तक के छात्रों के लिए कक्षाएं शुरू करने का निर्देश दिया है.

    सरकार ने स्कूलों से कहा है कि इसके लिए कोविड-19 संबंधी सभी दिशानिर्देशों का पालन किया जाना चाहिए.

    साथ ही इसके लिए स्कूलों में आने वाले छात्रों को अपने माता-पिता से इसके लिए लिखित अनुमति लेनी होगी.

  4. फ्रांस में एक रैली में बम लगाने के आरोप में ईरानी राजनयिक को 20 साल की सज़ा

    एक ईरानी राजनयिक को एक निर्वासित विपक्षी समूह की ओर से आयोजित रैली में बम लगाने की योजना बनाने का दोषी पाया गया है.

    49 साल के असदुल्लाह असादी वियना स्थित ईरानी दूतावास में कार्यरत थे. उन्हें बेल्जियम के एंटवर्प कोर्ट ने 20 साल की सज़ा सुनाई है.

    यह पहली बार है जब किसी ईरानी अधिकारी पर 1979 की क्रांति के बाद यूरोपीय संघ में इस तरह के आरोप लगे हैं.

    असादी के अलावा तीन और लोगों को भी बम विस्फोट करने की योजना बनाने का दोषी पाया गया है. इन्हें जर्मनी, फ्रांस और बेल्जियम की पुलिस ने ज्वाइंट ऑपरेशन के दौरान गिरफ़्तार किया था.

    ईरान इन आरोपों से इनकार करता रहा है और इसे साजिश करार देता रहा है.

    जून 2018 में निर्वासित नेशनल काउंसिल ऑफ़ रेसिस्टेंस ऑफ़ ईरान की एक रैली पेरिस के बाहर हुई थी. इस रैली में हज़ारों लोगों ने शिरकत की थी. इसमें डोनाल्ड ट्रंप के वकील रुडी गुलियानी भी शामिल थे.

    असादी पर आरोप है कि उन्होंने लक्समबर्ग में ईरानी मूल के एक बेल्जियन दंपति से मुलाक़ात कर उन्हें विस्फोटक दिया था. इस दंपति को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया.

    इस मामले में फ्रांस ने ईरान के ख़ुफ़िया विभाग पर योजना बना कर हमला करने का आरोप लगाया था और फ्रांस ने दो वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों की संपत्ति जब्त कर ली थी.

    अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के पद संभालने के कुछ हफ्तों के बाद यह फ़ैसला आया है. जो बाइडन के सत्ता में आने के बाद ईरान को यह उम्मीद है कि वो ट्रंप की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों को हटाएंगे.

  5. टोक्यो ओलंपिक प्रबंधन समिति के प्रमुख ने 'माफी' मांगी

    टोक्यो ओलंपिक प्रबंधन समिति के मुखिया योशिरो मोरी ने महिलाओं को लेकर अपनी ‘अनुचित’ टिप्पणी के लिए माफी मांगी है.

    उनकी इस टिप्पणी को लेकर उनके इस्तीफे की मांग उठ रही थी. 83 साल के योशिरो अपनी टिप्पणी को लेकर भले ही पीछे हट गए हों लेकिन उन्होंने इस्तीफ़ा देने से इंकार कर दिया है.

    उन्होंने बुधवार को जापानी ओलंपिक समिति की बैठक में कहा था कि "महिलाएँ बहुत बोलती हैं और चूंकि इस बैठक में कई महिलाएँ बोर्ड डायरेक्टर्स के तौर शामिल हैं इसलिए इस बैठक में बहुत समय लगने वाला है."

    ओलंपिक समिति के बोर्ड में अभी 24 सदस्य हैं जिनमें से पांच महिलाएँ हैं. यह समिति ओलंपिक में भाग लेने वाली जापानी खिलाड़ियों का चयन भी करती है.

    साल 2019 में समिति ने यह तय किया था कि समिति के बोर्ड में महिला डायरेक्टर्स की संख्या बढ़ाकर 40 फ़ीसद तक की जाएगी.

    मोरी 2000-01 के दौरान जापान के प्रधानमंत्री रह चुके हैं. इस दौरान अपने ग़ैर-कूटनीतिक बयानों के कारण को कई बार चर्चा में रहे.

  6. उत्तर कोरिया को मिलेंगी कोरोना वैक्सीन की 20 लाख डोज़

    कोराना वायरस वैक्सीन के समान वितरण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलाई जा रही मुहिम 'ग्लोबल कोवैक्स डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क' के तहत उत्तर कोरिया को वैक्सीन की 20 लाख डोज़ मिलने वाली हैं.

    ये ऑक्सफ़ोर्ड की बनाई एस्ट्राज़ेनेका कोरोना वैक्सीन होगी.

    साल भर पहले उत्तर कोरिया ने कोरोना महामारी के मद्देनज़र देश की सीमाएं सील कर दी थीं.

    अब तक उत्तर कोरिया ने देश में कोरोना वायरस संक्रमण के एक भी मामले की पुष्टि नहीं की है. हालांकि जानकार इस बात पर शक़ जताते हैं कि उत्तर कोरिया अब तक कोरोना फ़्री है.

    जानकारों का कहना है कि देश की सीमाओं पर कोरोना संक्रमण के कई मामले पाये गए थे.

    बीते साल कई ऐसे मामले भी सामने आये थे जब पूरे शहर में कड़ी पाबंदी लगा दी गई थी.

  7. किसान आंदोलन: 'पीएम मोदी को यहीं बुला दो, हम नहीं जाएंगे'

  8. नरेंद्र मोदी के भाई ने पूछा, अमित शाह के बेटे जय शाह को क्यों मिली क्रिकेट बोर्ड की ज़िम्मेदारी

  9. भारत हिन्द महासागर क्षेत्र के मित्र देशों को मिसाइल सिस्टम देने के लिए तैयार: राजनाथ सिंह

    भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को बेंगलुरु में आयोजित आईओआर डिफेंस मिनिस्टर्स कॉनक्लेव के दौरान कहा कि भारत सरकार हिन्द महासागर क्षेत्र में बसे मित्र देशों को कई तरह के मिसाइल सिस्टम, हैलिकॉप्टर, टैंक और आर्टिलरी गन की आपूर्ति करने के लिए तैयार है.

    उन्होंने कहा कि भारत सैन्य वाहन, रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफ़ेयर सिस्टम समेत कई अन्य तरह के हथियार भी हिन्द महासागर क्षेत्र के मित्र देशों को देने के लिए तैयार है.

    इस कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने भारत सरकार द्वारा शुरू की गईं परियोजनाओं जैसे सागरमाला, प्रोजेक्ट मौसम, एशिया-अफ़्रीका ग्रोथ कॉरिडोर को रेखांकित करते हुए बताया कि भारत सरकार इंडियन ओशियन रीजन के देशों के बीच व्यापार और पर्यटन बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है.

    इस क्षेत्र में अंजाम दिये गए भारतीय बचाव अभियानों पर बात करते हुए राजनाथ सिंह ने बताया कि भारत ने ग़ैर-लड़ाकू बचाव अभियानों में ज़ोर-शोर से भाग लिया है.

    वे कहते हैं, "भारत हमेशा ही मानवीय सहायता, ग़ैर-लड़ाकू बचाव अभियान और सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के मामले में आगे रहा है, और इस क्षेत्र में हम कई मौक़ों पर दुर्भाग्यशाली प्राकृतिक आपदाओं के समय अपनी सेवाएं देकर गर्व महसूस करते हैं."

  10. पीएम मोदी नंबर बता दें, तो लोग उन्हें फ़ोन कर सकेंगे: किसान नेता राकेश टिकैत

    किसान नेता राकेश टिकैत से जब सवाल किया गया कि 'मोदी जी ने कहा था कि वो एक फ़ोन-कॉल दूर हैं, तो किसान उन्हें क्यों फ़ोन नहीं करते?' इस पर टिकैत ने कहा, "वो कौन-सा नंबर है, वो हमें बता भी दें, तो मैं सार्वजनिक कर दूंगा, लोग उन्हें फ़ोन कर सकेंगे."

    उन्होंने कहा कि 'सरकार के साथ किसानों की समिति बात करेगी. अक्तूबर के महीने तक तो बात हो ही जाएगी.'

    विदेशी कलाकारों के किसान आंदोलन को समर्थन देने के बारे में राकेश टिकैत ने कहा, ”मुझे नहीं पता कि ये कौन कलाकार हैं, पर वे किसानों का समर्थन कर रहे, तो ये ठीक है.”

    ”अगर कोई विदेशी समर्थन कर रहा है तो इसमें क्या दिक्कत है? वो हम से कुछ ले-दे नहीं रहा, वो तो मन की बात बता रहा है.”

  11. ब्रेकिंग न्यूज़, ग्रेटा थनबर्ग ने कहा- 'मैं अब भी किसानों के साथ, नफ़रत और धमकियों से राय नहीं बदलने वाली'

    पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने कहा है कि “मैं अब भी किसानों के साथ खड़ी हूँ और उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन का पूरा समर्थन करती हूँ. नफ़रत, धमकियों और मानवाधिकारों के उल्लंघन से मेरी राय को बदला नहीं जा सकता.”

    गुरुवार को भी ग्रेटा ने किसानों के समर्थन में एक ट्वीट किया था. उन्होंने कहा था कि 'वे प्रदर्शनकारी किसानों के साथ हैं.'

    ग्रेटा ही नहीं, मशहूर सिंगर रिहाना ने भी गुरुवार को किसान आंदोलन के समर्थन में ट्वीट किया था.

    इन ट्वीट्स के बाद भारत में काफ़ी विवाद हुआ. सोशल मीडिया पर ग्रेटा और रिहाना के ख़िलाफ़ कई लोगों ने लिखा कि "विदेशी लोग भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी कर लोगों को बाँटने की कोशिश कर रहे हैं."

    विदेश मंत्रालय ने भी इस पर बयान जारी कर कहा कि "कुछ समूह, जिनके अपने स्वार्थ हैं, इन विरोधों पर अपने एजेंडे लागू करने की कोशिश करके इन्हें पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है."

    मगर कई लोगों ने ग्रेटा के ट्वीट की प्रशंसा की, जिनका कहना था कि ग्रेटा ने किसानों के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने में मदद की है, जिसके बारे में मोदी सरकार बात नहीं करना चाहती.

  12. चक्का जाम का समर्थन नहीं करेगा आरएसएस से जुड़ा भारतीय किसान संघ

    राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े भारतीय किसान संघ ने 6 फरवरी को होने वाले किसान संगठनों के चक्का जाम को अपना समर्थन नहीं दिया है.

    भारतीय किसान संघ ने कहा है कि वो 6 फरवरी को नेशनल और स्टेट हाईवे को तीन घंटे तक जाम रखने के किसान संगठनों के आह्वान का समर्थन नहीं करेगी.

    भारतीय किसान संघ के महासचिव बद्री नारायण चौधरी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “दिल्ली की सभी सीमाओं पर चल रहा विरोध-प्रदर्शन अब राजनीतिक हो गया है. यह साफ दिख रहा है कि यह राजनीतिक प्रौपेगैंडा बन चुका है.”

    उन्होंने कहा, “पहले कनाडा के नेताओं ने किसानों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया फिर ब्रिटेन के नेताओं ने और अब दूसरे देश के सेलेब्रिटी कर रहे हैं. इससे साबित होता है कि यह भारत के ख़िलाफ़ प्रौपेगैंडा है. वे देश की शांति और सौहार्द को बिगाड़ना चाहते हैं.”

    इससे पहले किसान संगठनों ने चक्का जाम की घोषणा करते हुए कहा था कि वे धरना स्थलों के पास इंटरनेट बंद करने, कथित तौर पर अधिकारियों की ओर से उन्हें प्रताड़ित करने और तीनों कृषि क़ानूनों के विरोध में तीन घंटों के लिए हाईवे बंद करेंगे.

  13. ऐसी बैरिकेडिंग कि दिल्ली बॉर्डर नहीं, अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर हो: प्रियंका गांधी

    कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने कहा है कि ”बीते दो महीनों से बैठे किसान आख़िर क्या कह रहे हैं, वो यही तो कह रहे हैं कि हमारे लिए क़ानून बना रहे हैं तो हमसे पूछो कि इसका हम पर क्या असर पड़ेगा.”

    प्रियंका गांधी दिल्ली में गणतंत्र दिवस के दिन हुई हिंसा में मारे गए नवरीत सिंह के परिवार से मुलाक़ात करने उत्तर प्रदेश के रामपुर पहुंची थीं.

    परिवार से मुलाक़ात करने के बाद प्रियंका गांधी ने कहा कि, ”ये किसानों की लड़ाई है जिसके पीछे न कोई राजनेता हैं और न ही कोई राजनीतिक पार्टी.”

    ”पीएम मोदी ने हाल में कहा कि अगर किसान बात करना चाहें तो मैं एक फ़ोन कॉल दूर हैं. उनमें इतना अहंकार है कि वो किसानों से मिलने नहीं जा सकते. प्रधानमंत्री आवास से दिल्ली बॉर्डर आख़िर दूर ही कितना है.”

    दिल्ली के बॉर्डर पर इस तरह से बैरिकेडिंग की गई है जैसे वो अंतरराष्ट्रीय सीमा हो.

    उन्होंने कहा, ”सत्ता में बैठी सरकार को अब अहंकार हो गया है. जनता से उसका जुड़ाव टूट गया है, उसे अब जनता की आवाज़ सुनाई नहीं दे रही है.”

  14. कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गर्वनर हाउस तक मार्च

    कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कांग्रेस विधायकों के साथ किसानों के मुद्दों को लेकर चंडीगढ़ में हरियाणा एमएलए होस्टल से गवर्नर आवास तक मार्च किया है.

    भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस मौके पर कहा, “हमने कई बार विशेष सत्र की मांग की है लेकिन हमारी बात नहीं सुनी जा रही है. हम सदन में विश्वास मत के माध्यम से किसान क़ानूनों पर चर्चा करना चाहते हैं. इस सरकार ने अपना विश्वास खो दिया है.”

    तीन नए कृषि क़ानूनों को लेकर किसान संगठन दो महीने से ज्यादा वक्त से हरियाणा और उत्तर प्रदेश से लगे दिल्ली बॉर्डर पर धरने पर बैठे हुए हैं.

  15. ट्विटर ने डिलीट किये कंगना रनौट के कई ट्वीट

    माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने अपने नियमों का हवाला देते हुए बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौट के कुछ ट्वीट्स डिलीट कर दिए हैं.

    पिछले कुछ दिनों से कंगना रनौट किसान आंदोलन पर सरकार को घेरने वालों के ख़िलाफ़ ट्वीट कर रही थीं.

    अंतरराष्ट्रीय पॉप सिंगर रिहाना से लेकर ग्रेटा थनबर्ग के किसान आंदोलन पर ट्वीट करने के बाद से कंगना ने दोनों हस्तियों को सोशल मीडिया पर आड़े हाथों लिया है.

    कंगना ने अपने एक ट्वीट में रिहाना को पॉर्न स्टार कहा है तो वहीं जगमीत सिंह को आतंकवादी की संज्ञा दी है. इसके साथ ही कंगना ने एक दूसरी बॉलीवुड एक्ट्रेस तापसी पन्नू को भी आड़े हाथों लिया है.

    तापसी पन्नू को बी ग्रेड एक्ट्रेस बताते हुए कंगना ने लिखा है, “बी ग्रेड लोगों की सोच बी ग्रेड होती है. एक शख़्स को अपनी आस्था, मातृभूमि और परिवार के लिए खड़ा होना चाहिए. यही कर्म है, यही धर्म भी है. फ्री फंड का सिर्फ खाने वाले मत बनो, इस देश का बोझ. इसी वजह से मैं इन्हें बी ग्रेड कहती हूं....इन्हें नज़रअंदाज़ करो.”

  16. किसान आंदोलन: तापसी पन्नू के ट्वीट पर कंगना का हमला

    बॉलीवुड अभिनेत्री तापसी पन्नू ने गुरुवार सुबह किसान आंदोलन पर रिहाना, ग्रेटा थनबर्ग से लेकर तमाम बॉलीवुड हस्तियों के ट्वीट से जुड़ा एक ट्वीट किया है.

    तापसी पन्नू ने अपने ट्वीट में लिखा है, “अगर एक ट्वीट आपकी एकता को कमज़ोर कर सकता है, एक मज़ाक आपके भरोसे को डिगा देता है या एक कार्यक्रम आपकी धार्मिक आस्था को चोट पहुंचा सकता है, तो आपको अपने मूल्यों पर फिर से विचार करने की ज़रूरत है, न कि दूसरों के लिए ‘प्रोपोगैंडा टीचर’ बनने की.”

    रिहाना और ग्रेटा का ट्वीट आने के बाद से भारत सरकार से लेकर बॉलीवुड और क्रिकेट की दुनिया से जुड़ीं दर्जनों हस्तियां सरकारी बयान से मेल खाते हुए ट्वीट कर चुके हैं.

    ये सभी ट्वीट लोगों को बाहरी व्यक्तियों (जैसे रिहाना और ग्रेटा) से प्रभावित होकर भारतीय एकता को चोट पहुंचाने से बचाने की अपील करते नज़र आते हैं.

    लेकिन तापसी का ट्वीट इस पूरे मामले पर एक टिप्पणी जैसा है. तापसी के ट्वीट के बाद कई लोगों ने लिखा है कि बॉलीवुड को तापसी जैसे लोगों की ज़्यादा ज़रूरत है.

    लेकिन वहीं, कंगना रनौट ने लिखा है, “बी ग्रेड लोगों की सोच बी ग्रेड होती है. एक शख़्स को अपनी आस्था, मातृभूमि और परिवार के लिए खड़ा होना चाहिए. यही कर्म है, यही धर्म भी है. फ्री फंड का सिर्फ खाने वाले मत बनो, इस देश का बोझ. इसी वजह से मैं इन्हें बी ग्रेड कहती हूं....इन्हें नज़रअंदाज़ करो.”

  17. किसान आंदोलन: नौजवान प्रदर्शनकारियों ने इंटरनेट बंद करने पर क्या बोला?

  18. ट्रैक्टर रैली में मारे गये किसान के घर पहुँचीं प्रियंका गांधी वाड्रा

    कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली के दौरान मारे गए युवक नवरीत सिंह के परिवार से मिलने पहुँची हैं.

    नवरीत सिंह रामपुर ज़िले के (उत्तर प्रदेश) बिलासपुर क्षेत्र से वास्ता रखते थे.

    किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान ट्रैक्टर पलटने से नवरीत की मौत हो गई थी.

    गुरुवार सुबह, रामपुर जाते समय प्रियंका गाँधी वाड्रा ने एक ट्वीट में लिखा था, “सूरा सो पहचानिए, जो लरै दीन के हेत, पुरजा-पुरजा कट मरै, कबहू ना छाडे खेत.”

  19. कृषि को लाभ का व्यापार बनाएंगे हमारे फ़ैसले: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चौरा-चौरी संग्राम के शताब्दी समारोह में बोलते हुए कहा है कि उनकी सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'चौरा चौरी के संग्राम में भी किसानों की बहुत बड़ी भूमिका थी.'

    उन्होंने कहा, "किसान आगे बढ़ेंगे, आत्मनिर्भर बनें, इसके लिए पिछले छह सालों में किसानों के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं. इसका परिणाम देश ने कोरोना काल में देखा भी है."

    "महामारी की चुनौतियों के बीच भी हमारा कृषि क्षेत्र मज़बूती से आगे बढ़ा और किसानों ने रिकॉर्ड उत्पादन करके दिखाया. हमारा किसान अगर और सशक्त होगा तो कृषि क्षेत्र में ये प्रगति और तेज़ होगी इसके लिए इस बजट में कई कदम उठाए गए हैं."

    "मंडियाँ किसानों के फायदे का बाज़ार बने इसके लिए एक हज़ार और मंडियों को जोड़ा जाएगा. यानी मंडी में जब किसान अपनी फसल बेचने जाएगा तो उसे और आसानी हो जाएगी. वो अपनी फसल कहीं भी बेच सकेगा."

    "इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर फंड को बढ़ाकर चालीस हज़ार करोड़ रुपये किया गया है. इसका भी सीधा फ़ायदा किसानों को होगा. ये सब फैसले हमारे किसानों को आत्मनिर्भर बनाएंगे. हमारे फैसले कृषि को लाभ का व्यापार बनाएंगे.”

  20. ये लोकतंत्र का काला दिन है, हम चुने हुए प्रतिनिधि हैं, दंगाई नहीं – हरसिमरत कौर बादल

    अकाली दल नेता और सांसद हरसिमरत कौर बादल ने पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद सरकार की निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र का काला दिन क़रार दिया है.

    बादल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा है, “हम अपने लोगों से बात करने आए थे. हम चुने हुए जन प्रतिनिधि हैं. हम कोई दंगा फसाद करने या भड़काने के लिए नहीं आए हैं. हम सिर्फ अपने लोगों का हालचाल पूछने के लिए आए हैं. लेकिन ये जाने ही नहीं दे रहे हैं.”

    उन्होंने ट्वीट करके कहा है, “देखिए, बीजेपी के नेतृत्व वाली भारत सरकार किस तरह सांसदों के साथ भी मनमानी कर रही है. हमें शांतिपूर्ण धरनास्थल तक जाने के रास्ते में तीन किलोमीटर पहले ही उतार दिया गया. लेकिन हम अडिग हैं. हम खुद जाकर अपनी आँखों से स्थितियों को देखना चाहते हैं और सरकार को कार्रवाई करने के लिए विवश करना चाहते हैं.”

    और उन्होंने लिखा है, “अकाली दल उन सभी समान विचारों वाले दलों और सांसदों के साथ खड़ी है जो कि गाज़ीपुर बॉर्डर जाकर किसानों पर किए जा रहे ज़ुल्मों की निंदा कर रहे हैं. यहां तक कि सांसदों को भी शांति से विरोध कर रहे किसानों से मिलने की इजाज़त नहीं है. ये सच में लोकतंत्र का काला दिन है.”